रिन्द और साकी

आ गया आज इधर,
कल से फिर न आऊँगा;
किए पे अपने,
सजा कुछ-न-कुछ तो पाऊँगा !?…
आज की रात तो हँस-हँस के पिला दे साकी,
फिर न पीने की कसम आज लिए जाऊँगा !!
तू रहे साथ तो जीने का मजा आता है,
दूर हो जाने पे पीना भी नहीं भाता है;
न छुड़ा अपना ये दामन कभी तू रिन्दों से,
… कि जिनकी चाह में यह हुस्न जगमगाता है !!

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