मेरे भारत के वीरों

भर दे हूँकार रग-रग में
हाथों में वह मशाल जला दो,
आजादी के “उन” नारों को
फिर से एक बार दोहरा दो ।
नींद से जागो मेरे वीरों
दुश्मन को ललकार दिखा दो,
लगा तिलक माथे पर अब
माता का दुलार दिखा दो ।।
रौंद डालो उनका सीना
उनको शरहद पार भगा दो,
भूलो मत पुरखों की यादें
वह सोया स्वाभिमान जगा दो ।।
छाया है घनघोर अंधेरा
उनको ये चमत्कार दिखा दो,
भागेगा वह मुँह छुपाकर
पर्वत-पर्वत आग लगा दो ।।
मोड़ दे जो तूफानों का रूख
वह शक्ति अपार दिखा दो,
रंग डाले जो अपमान को
वह खूनी हूँकार दिखा दो ।।
छलनी कर दो उनकी छाती,
वाणों की बौछार दिखा दो,
भूल जाये तेरे देश का अनहित
वह दैविक तलवार दिखा दो ।।

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