बूढ़ी भिखारिन

हृदय विदारक क्रन्दन तेरा-
मुख मंडल पर घोर अंधेरा !
तन पर धोती लटक रही है,
कमर झुकी है नज़र टिकी है !
मुठ्ठी भर कुछ पा लेने को-
बूढ़ी भिखारिन भटक रही है ।
जीवन की कुछ आश लिए-
अधरों पर अनबूझ प्यास लिए,
मंदिर पर माथा पटक रही है,
बूढ़ी भिखारिन भटक रही है ।

You May Also Like

2 thoughts on “बूढ़ी भिखारिन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *