नायिका

ये उन्मत अल्हड़ सा-
यौवन,
कोमल सरल मदिरालय-
चितवन,
मृगिनी नयन;
लता सी कटि,
नागिन लट-
बल खाती सी,
नीरव नयनों के
साँचे में आकर-
निश्छल रूप वन;
ढल जाती सी ।
कल-कल, छल-छल
निर्झर सा-
सावन की नदियां-
मदमाती सी ।
सुप्त चेतना झंकृत करती-
नुपुरों की रुन-झुन,
बिखराती सी ।
हृदय वेग,
उठ-उठ जाता-
चंचल पवन,
मधुमती सी ।

You May Also Like

2 thoughts on “नायिका

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *